| Jan 01, 1970 | Daily Report |
| RISING BHARAT | News Count (102375) | |
21551. Meet The School Teacher Making Way For 500 Elephants to Cross 25 Tea Gardens
Life for Society: Case Studies
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Inspiring Stories of Students/Employees/Senior citizen/Organisation/individual
English
West Bengal
The Better India
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- SP Pandey runs SPOAR – Society for Protecting Ophiofauna and Animal Rights – an organisation that works to resolve animal human conflict in West Bengal, and collaborates with the forest officials, gram panchayat and tea estate owners
- A group of villagers teased a herd of elephants on NH 39 and when one of them retaliated, it led to the death of Munda, a local. S P Pandey, a primary school teacher from Malbazar in Jalpaiguri district, has been conducting sensitisation workshops for the last two years across five elephant corridors.
- SP Pandy approached more than 25 tea state owners and requested them to replace electrical fencing with natural fencing like wood, bamboo or bushes.
21552. 88 की उम्र में 18 की फिटनेस! रोज़ 4 घंटे की गार्डनिंग है इसका राज़
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Hindi
Gujarat
The Better India
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- 88 वर्षीय पद्माकर फरसोले, 30 सालों से बागवानी कर रहे हैं। वह घर पर ही कम्पोस्ट बनाकर जैविक फल-सब्जियां उगाते हैं और इसे ही वह अपने अच्छे स्वास्थ्य का कारण भी मानते हैं। उनके 425 स्क्वायर यार्ड के प्लॉट के तकरीबन आधे हिस्से में घर है और आधे में गार्डन, जिसमें उन्होंने हजारों पौधे लगाए हैं।
- यूँ तो मुझे हमेशा से पौधों का शौक़ रहा है। हालांकि किराये के मकान में कभी ज्यादा पौधे लगाने का मौका नहीं मिला। लेकिन साल 1985 में, जब मैंने खुद का घर बनवाया, तब जाकर मैं ढेरों पौधे लगा पाया।
- वह साल में 1000 किलो कम्पोस्ट तैयार कर लेते हैं। उनका कहना है, “खुद कम्पोस्ट तैयार करने से, साल में 5000 रुपये की बचत होती है। क्योंकि मुझे बाहर से कुछ भी नहीं लेना पड़ता, ऊपर से सोसाइटी में सफाई भी रहती है।
21553. भारतीय सेना जम्मू और कश्मीर के स्थानीय लोगों को मशरूम की खेती से बनाएगी आत्मनिर्भर
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Hindi
Jammu and Kashmir
Republic
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- भारतीय सेना न केवल दुश्मनों से लड़ती है बल्कि जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करती है। सेना ने किश्तवाड़ जिले के शेरगवारी के नागरिना गांव में बेरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मशरूम की खेती परियोजना का उद्घाटन किया है।
- इसमें स्थानीय बेरोजगारों को गांव में 60 दिवसीय वाणिज्यिक मशरूम की खेती के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी। लाभार्थियों में आतंकवादी हमलों के शिकार, स्थायी रूप से अक्षम / मारे गए आतंकवादियों के परिवार के सदस्य, विकलांग व्यक्ति और गरीबी रेखा से नीचे के लोग शामिल हैं।
- प्रशिक्षण कृषि विभाग द्वारा दिया जाएगा। इसकी निगरानी सेना द्वारा की जाएगी। भारतीय सेना की इस पहल से स्थानीय लोगों का विकास होगा। वो इससे आत्मनिर्भर बन पाएंगे।
21554. गरीबों का मुफ्त इलाज करते हैं यह डॉक्टर, कई बार खुद की जेब से देते हैं दवा के पैसे भी
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Hindi
Jharkhand
The Better India
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- झारखंड के रांची में रहने वाले 52 वर्षीय डॉक्टर अनिल कुमार का। साल 1995 में अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने वाले डॉ. अनिल ने गुजरात और झारखंड के सरकारी स्वास्थ्य विभागों में कई सालों तक अपनी सेवाएं दी हैं।
- शहर में उन्हें लोग ‘गरीबों का मुफ्त इलाज करने वाले’ डॉक्टर के रूप में जानते हैं। लॉकडाउन और कोरोना महामारी के दौरान जब उन्होंने लोगों की मदद के लिए ‘Save Life Mission’ के नाम से व्हाट्सऐप ग्रुप शुरू किए तो लोगों को उनके काम के बारे में पता चला।
- व्हाट्सऐप के जरिये हर तबके के लोग मुझसे जुड़े हुए हैं। मैंने कभी भी किसी को ऑनलाइन परामर्श देने के लिए मना नहीं किया। न ही इसके लिए कोई फीस ली।
21555. दोनों पैर नकली लेकिन हौसले थे फौलाद, यूरोप की सबसे ऊंची चोटी फतह कर गए चित्रसेन
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Hindi
Chhattisgarh
Your Story
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- जब हौसले बुलंद हो तो किसी भी बाधा को पार करते हुए कामयाबी पाई जा सकती है और छत्तीसगढ़ के युवा पर्वतारोही चित्रसेन साहू इस का ताजा उदाहरण हैं। साल 2014 में हुए एक हादसे के चलते चित्रसेन को अपने पैर गँवाने पड़ गए थे।
- चित्रसेन ने अपने कृत्रिम पैरों के साथ यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस को फतह कर एक नेशनल रिकॉर्ड स्थापित कर दिया है। चित्रसेन को यह कामयाबी 23 अगस्त को हासिल हुई थी जब उन्होने चोटी पर गर्व के साथ तिरंगे को लहराया था। रूस में स्थित इस पर्वत की ऊंचाई 5 हज़ार 642 मीटर है। अपनी इस सफलता के साथ अब चित्रसेन ऐसा करने वाले देश के पहले डबल अम्पुटी पर्वतारोही भी बन गए हैं।
- चित्रसेन के नाम 14 हज़ार फीट से स्काई डाइविंग करने का भी रिकॉर्ड दर्ज़ है, इतना ही नहीं वे एक सर्टिफाइड स्कूबा डाईवर भी हैं।
21556. कोरोना काल में माँ-बाप खोने वाले बच्चों के लिए मसीहा बने शशि प्रकाश, कर रहे हैं अनाथ बच्चों की शिक्षा का प्रबंध
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Hindi
India
Your Story
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- इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही शशि प्रकाश ने शिक्षण कार्य की तरफ रुख कर लिया था।
- बीते 14 सालों से लगातार शिक्षण कार्य में जुटे शशि प्रकाश सिंह फिलहाल कोटा से अनअकैडमी के छात्रों को पढ़ा रहे हैं।
- आज शशि सिंह ने इस साल 2021 जरूररतमंद बच्चों की आर्थिक मदद करने का लक्ष्य रखा है।
21557. ‘बंगाल के पैडमैन’ ने स्थापित की 70 से अधिक पैड वेंडिंग मशीन, जहां महिलाएं 2 रुपये में ले सकती हैं सैनेटरी पैड्स
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West Bengal
Your Story
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- अब तक सोभन ने कोलकाता भर में 70 वॉशरूम पर बकायदा वेंडिंग मशीन स्थापित करने का काम किया है
- साथ ही महिलाओं के लिए ‘बंधन नैपकिन’ नाम से एक ऐप भी तैयार की है जिसके जरिये महिलाएं इन वेंडिंग मशीन को लोकेट कर सकती हैं।
- मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसका दुरुपयोग न हो इसके लिए शोभन ने सैनेटरी पैड्स दो रुपये का शुल्क तय किया है
21558. मदद के लिए बैंक बैलेंस नहीं, दिल होना चाहिए बड़ा; पढ़ें 25 वृद्धों वाले इस परिवार की कहानी
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Odisha
The Better India
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- ओड़िशा के रहनेवाले किसान, जलंधर पटेल के पास खेत और घर भले ही बड़ा न हो, लेकिन उनका दिल बहुत बड़ा है। सिर्फ चार एकड़ खेत से, वह अपने परिवार का खर्च चलाने के साथ-साथ, 25 बेसहारा बुजुर्गों को भी आसरा दे रहे हैं। उनके पास पैसे नहीं बचते, जितना भी कमाते हैं वह पूरा का पूरा खर्च हो जाता है। कभी-कभी तो लोन भी लेना पड़ता है।
- लेकिन इसके बावजूद कभी भी इस वृद्धाश्रम को बंद करने के बारे में नहीं सोचा। जितने भी लोग मेरे पास आते हैं, वह और उनका परिवार उनकी ख़ुशी-ख़ुशी देखभाल करते हैं साल 2017 में पार्वती गिरी के नाम से ही वृद्धाश्रम शुरू किया। तब उन्होंने 10 से 15 लोगों के रहने के लिए कमरा बनवाया और छह लोगों के साथ इस आश्रम की शुरुआत की
- आज इस आश्रम में 25 लोग रह रहे हैं। वह उनके रहने के साथ-साथ, उनके खाने-पीने और दवाइयों का खर्च भी उठाते हैं।
21559. Scientist Quits Job To Innovate Teaching Model, Helps Over 26000 Students
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English
Jharkhand
The Better India
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- Mohammad Sajid Hussain is a scientist and educator from Jharkhand, who quit his high-flying job to return to his native village start Schoolasium, a learning centre that employs a different learning model to teach underprivileged students across the state.
- school does not follow conventional practices of teaching, which involve monologues and one-way dissemination of knowledge from teacher to students the school acts as a study lab for students, where they gain access to academic materials for practical learning.
- The school charges a fee of Rs 500 a month, which is waived off if the parents cannot afford it. over 26,618 students from 85 villages have been reached with this educational model, with more than 621 teachers implementing it in 122 schools. “There are 177 educators who conduct training for the teachers,”
21560. बीते 16 सालों से महज़ एक रुपये में इडली बेच रहा है यह शख्स, इस वजह से नहीं बढ़ाए कभी इडली के दाम
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Hindi
Andhra Pradesh
BBC News
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- आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी के राय भोपाल पट्टनम गाँव में स्थित छोटे से होटल का संचालन चिन्ना रामबाबू कर रहे हैं जो बीते 16 सालों से अपने क्षेत्र के लोगों को लगातार स्वादिस्ट इडली परोस रहे हैं। अब अगर किसी छोटे होटल की भी बात करें तो वहाँ पर भी आपको एक प्लेट इडली के लिए लगभग 25 से 30 रुपये का भुगतान करना पड़ेगा, लेकिन राय भोपाल सिर्फ 1 रुपये में इडली खिला रहे हैं।
- इस काम को जारी रखने के लिए चिन्ना रामबाबू को उनकी पत्नी और उनकी सास की पूरी मदद मिलती है सुबह 5 बजे से इडली की बिक्री शुरू कर देने के लिए चिन्ना रामबाबू को सुबह तड़के साढ़े 3 बजे उठना पड़ता है
- इडली की इतनी कम कीमत पर बीबीसी से बात करते हुए बताया था कि जब इस होटल की शुरुआत हुई थी तब क्षेत्र के सभी होटलों में भी लगभग एक ही रेट पर इडली मिलती थी। फिर जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती गई अन्य होटल मालिकों ने अपनी इडली के दाम बढ़ाने शुरू कर दिये, लेकिन चिन्ना रामबाबू ने ऐसा नहीं किया।